Thursday, March 25, 2021

उर्मिला सिदार की रचना- एकलव्य

रचनाकार-उर्मिला सिदार
ग्राम -बुलाँकी 
जिला -रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
विधा- कविता
विषय -एकलव्य 
दिनांक -25/03/2021
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           *एकलव्य*

श्रेष्ठता स्वीकारा था एकलव्य ने,
श्रेष्ठता का सम्मान किया।
अध्ययन अभ्यास कर वह,
धनुर्विद्या में पारंगत हुआ।

कल्पनाशीलता और तीव्र इच्छा ने,
धैर्य,तन्मयता का प्रेरणा दिया ।
मन,तन से एकाग्र होकर वह,
निरंतर अभ्यास से निष्णात हुआ।

गुरु के प्रति कितनी श्रद्धा थी,
अंगूठा दे श्रद्धा का मान रखा।
अपनी धनुर्विद्या पारंगतता से,
सहर्ष गुरु को दक्षिणा दिया।

जिसके लिए अपमान झेला था,
उन्हीं के प्रति श्रद्धा पूरित हुए।
अंतर्मन की ख्वाहिशें पाकर,
अपने अरमान को कुर्बान किये। 

स्वार्थी नहीं पहचान पाए उनके,
अंतर्मन की कामनाओं को।
प्रमाणित होने के पूर्व वह,
माँग लिए अरमानों को।

वीर एकलव्य श्रेष्ठ  हो गए ,
शिष्य संबंध निर्वहन में ।
उनकी श्रेष्ठ शिष्य होने का,
गुणगान होता है जहान में।

धन्य तुम्हारे पूर्वज एकलव्य,
धन्य था तुम्हारा संस्कार।
धनुर्विद्या में निष्णात हो ,
जग में रखा गुरु का मान।
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 उर्मिला सुधार रायगढ़ छत्तीसगढ़

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