Thursday, March 25, 2021

अनुरमा शुक्ला की रचना- एकलव्य

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा- कविता
शीर्षक- गुरुभक्त एकलव्य


        अब ना कोई एकलव्य
        ना ही गुरु द्रोणाचार्य 
        अपनी विद्या से स्वयं
        की करते हैं गुणगान ।
अँगूठा काट रख दे अपनी
महान गुरुभक्त कहलाये
ऐसा कौन जो अपनी
विद्या ही समर्पित कर जाये ।
     अर्जुन बनना है आसान
     द्रोणाचार्य भी होंगे कितने
     दान करे जो मुफ्त विद्या
     ऐसे गुरु विरले ही होंगे
प्रतिमा को गुरु मानकर 
अभ्यास कठोर कर जाये
ऐसा श्रेष्ठ धनुर्धर जग में
एकलव्य ही कहलाये ।।

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