जिला - कोरबा, छ.ग.
विषय - शिव
विधा-कविता
शीर्षक-शिव
----हे अजन्मा , हे अविनाशी, हे महाकाल ,तू कैलाश वासी ।
हे अभयंकर, हे त्रिपुरारी,
तेरे दर से कोई खाली नहीं जाते ,
हे दुख हर्ता,हे भोला भंड़ारी ।
जनमानस के कल्याण हेतु , तुम
हलाहल पी जाते हो
हे नीलकंठ, हे
प्रलयंकारी हे त्रिनेत्र धारी ,
गले में भुजंग विराजे करते नंदी की सवारी ।
हे चंद्र मौली , हे गंगाधर,
कृपा दृष्टि दें हे कृपानिधान अर्पण कर दूँ मैं निज अभिमान।
श्रद्धा सुमन तुझे अर्पित कर दूँ ,
झोली मेरी भर दे
हे भगवन ।
बारंबार विनती करुँ
चाहूँ मैं एक ही वरदान,
भवसागर से पार लगा दो ,
दयाकरो हे दयानिधान ।
चरणकमल में अनंतभक्ति माँगूं
इतना वर दे दो ,
हे भोलेनाथ
भगवान।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ. ग.
बहुत सुंदर
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