Wednesday, March 31, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- सरहद

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.) विषय-सरहद,दिनाँक-31.03.21

                 सरहद

सरहद होती है एक सीमा रेखा 
         जो बाँटे है,घर परिवार देश ,
हिंदुकुश पर्वतों तक 
           फैला था परिवेश।

आर्यावर्त भी था एक बड़ा 
         विशाल और मजबूत देश ,
टूटकर बन गए कई 
         देश बना लिए नाम विशेष।

ईरान अफगानिस्तान
          नेपाल लंका पाके थे, 
कभी आर्यावर्त के 
      सुंदर सुहाने अवशेष ।

आज बंट गया देश, 
       सरहदों पर होती मारकाट,
 यह तेरा यह मेरा 
        होती रहती काट छांट ।

विश्व गुरु कहलाता 
      विश्व बंधुत्व का देता था पैगाम,
 सरहद ने बाँट दिए सारी 
         सभ्यता संस्कृति ललाम।

 हमने तो बाँट दिए मगर 
         प्रकृति अभी भी है मेहरबान,
 सरहद पर हर दम
         रखती है अपनी निगाहबान।
_________________

       नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर, (छ .ग.)

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