Thursday, March 4, 2021

संतराम कुम्हार की रचना- ढलैत

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
    विषय - ढलैत
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " तुझे योध्दा बनना है  "
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चुनौतियों से अब तुम्हें लड़ना है।
हे वीर! तुझे योध्दा बनना है।
अपनी सुरक्षा खुद ही करना है।
हे वीर! तुझे योध्दा बनना है।।

जिन्दगी एक संघर्ष है।
पाप और पुण्य में एक निष्कर्ष है।
सोच-समझकर रास्ता, तुम्हें चुनना है।
हे वीर! तुझे योध्दा बनना है।।

सत्विचार का कवच बनाओ। 
दुर्गुणों को दूर भगाओ।
बुराइयों से तुम्हें लड़ना है। 
हे वीर! तुझे योध्दा बनना है।।

जीवन तो एक फसाना है। 
जख्म को नासुर नहीं बनाना है। 
नई शुरुआत शुरू, तुम्हें करना है। 
हे वीर! तुझे योध्दा बनना है।।

आत्मविश्वास को ढाल बनाओ। 
अन्तर्मन को अपने जगाओ।
अन्याय न तुम्हें सहना है।
हे वीर! तुझे योध्दा बनना है।।

विपत्ति में तुम घबराना नहीं।
रणभूमि छोड़ कभी जाना नहीं।
जीवनयुध्द अब तुम्हें लड़ना है।
हे वीर! तुझे योध्दा बनना है।।

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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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