Tuesday, March 9, 2021

लीलाधर कुम्हार की रचना शिव महिमा

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - शिव
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - शिव महिमा
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        // शिव महिमा//

परमपिता परमात्मा शिव जी ।
सबके पालक रक्षक शिव जी ।।
जगतपिता जगदीश्वर शिव जी ।
घट - घट अंतर्यामी शिव जी ।।
महादेव कहलाते शिव जी ।
घर - घर पूजे जाते शिव जी ।।
जल्दी खुश हो जाते शिव जी ।
मनोवांछित वर देते शिव जी ।।
डम - डम डमरू बजाते शिव जी ।
ताण्डव नृत्य दिखाते शिव जी ।।
त्रिशूल धारी शंकर शिव जी ।
अखण्ड समाधि वाले शिव जी ।।
जटा में गंगा बहाते शिव जी ।
अंग भभूत रमाते शिव जी ।।
विष को धारण करते शिव जी ।
नीलकंठ कहलाते शिव जी ।।
करते बैल सवारी शिव जी ।
बाघम्बर तन धारी शिव जी ।।
गले में सर्प लपेटे शिव जी ।
अमंगल वेश में रहते शिव जी ।।
हरते दुःख अमंगल शिव जी ।
शुभ कल्याण की मूर्ति शिव जी ।।
महाकाल कैलाशी शिव जी ।
पार्वती के स्वामी शिव जी ।।
गणनायक सुत वाले शिव जी ।
चन्द्रभाल त्रिलोचन शिव जी ।।
द्वादशज्योतिर्लिंग में शिव जी ।
सभी जगह कण - कण में शिव जी ।।
देवों के भी देव हैं शिव जी । 
भाव के भूखे भोले शिव जी ।।
बिलि पत्र के प्रेमी शिव जी ।
दुग्ध नारियल चढ़ते शिव जी ।।
या जल ही स्वीकारते शिव जी ।
भक्तों से रिश्ता निभाते शिव जी ।।
आनन्द मंगलकारी शिव जी ।
सुंदर सत्य अद्वितीय शिव जी ।।
गुरू रूप मे आते शिव जी ।
भव से पार कराते शिव जी ।।
पावन मधुर प्रदाता शिव जी ।
भोग मोक्ष के दाता शिव जी ।।
मालिक विश्व विधाता शिव जी ।
देखे सबकी खाता शिव जी ।।
ज्ञान भक्ति वैराग्य हैं शिव जी ।
सर्व सुमंगल हितकर शिव जी ।।
नमः शिवाय ॐ बं बं शिव जी ।
हर हर महादेव जय हो शिव जी ।।
शिव शिव शिव शिव बोलो शिव जी ।
शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव जी ।।

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