Tuesday, March 23, 2021

छंद मुक्त कविता -गोमती सिंह जी की


रचनाकार-गोमती सिंह
जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय-धरा 
विधा-छंद मुक्त कविता 
शीर्षक- हे माँ धरणी 
----- हे माँ धरणी ! हे माँ वसुंधरा ,
गेहुंआ रंग है मुखमण्डल तेरा।

हरियाली की चुनर ओढे ,
कितना अनुपम रुप है तेरा ।

दिल में तेरे शोले रहते ,
मुख मे.ठंड़क का है बसेरा ।

कितनी शीतलता माँ तेरे तन में ,
लाखों कष्ट सहन करके ,
वात्सल्य लबालब तेरे मन में ।

तेरे आँचल में माँ ! भरी है अन्न की थाली ,

सीने में वार सहन करके जल की फौव्वारा देती ।

भोर के प्रथम जागरण में माँ !
हम तेरा वंदन करते हैं ।

तब फिर तेरे सतह में माँ कदम रखा  हम करते हैं ।

हे माँ! तेरी ममता का.मोल कैसे चुकाएंगे !

एक राह सुझता है माँ! 
निज हाथों से हम वृक्ष एक लगाएंगे ।
      ।।इति।।
   " गोमती सिंह"
    कोरबा, छ.ग.

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