Thursday, March 18, 2021

रजनी शर्मा बस्तरिया की रचना- बसाहट

 रचनाकार- श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया 
जिला- रायपुर छत्तीसगढ़               
विधा- मुक्त छंद   
शीर्षक- " बासाछोड़ों की बसाहट"  

पानी की होने लगी  बसाहट, 
धूसर काले बादलों में।
 हवा कनसुरी सुनकर आहट ,
ठौर बना बैठे पुरवाई में।

 बंजर धरती सजाए बाजवट,
 बीराजी बौछार पतुरिया आंगन में 
 आड़ी तिरछी छूटी सी लिखावट,
  मन उकेरे मौसम के पन्नों में।
   
 यादों के जुगनुओं की जगमगाहट    ‌ 
रीते मन के भीगे जंगलों में।
 बांचे चिट्ठियां बेकार दिखावट में,  ‌ 
संदेशा हरकारा पाती के झोले में।

 सुक्खम -दुक्खम की बसाहट, ‌  ‌   ‌ 
होने लगी अंतस के चौबारे में।।
बासाछोड़  बने फिरे दूरदेसिया,
नये तेवर हैं जो अब बसाहट में।

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