Thursday, March 18, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- बसाहट

नाम गिरधारी लाल चौहान
स्थान नवापारा खुर्द सक्ति
जिला जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा---आलेख कविता ग़ज़ल
विषय--- बसाहट
शीर्षक ---ऐसी हो बसाहट

ऐसी हो बसाहट अपनी ,जिसको जाने जहान ।
राम कृष्ण गौतम दिनकर सम,जन्मे पुत्र महान ।
न हो लंका तरह नगरी,न रावण सम पुरुष ।
न हो नारी सूर्पनखा जैसे,जो दे दुनियां को दुख ।

अपनी भी बसाहट है, जहां हवाओं की आहट है ।
घन अमराई बरगद पीपल, चिड़ियों की चहचहाहट है ।
घर हैं सुंदर लघु विशाल, अवध काशी सम बनावट है ।
गोकुल अवध की तरह नारियां,चांद सा जगमगाहट है ।

बसाहट के आसपास ही , चलते अपने सारे काम ।
पूरे दिन मेहनत की पूजा,रात थोड़ा सा  विश्राम हैं ।
गांव के चारों ओर है खेती, यही धंधा व्यवसाय है ।
श्रेष्ठ मानते हम इसको,सबका इसमें अध्याय है ।

सड़क है अपनी बसाहट में,नल जल बिजली रेल ।
होटल सिनेमा घर मंदिर चर्च अस्पताल कचहरी जेल ।
मस्जिद वाचनालय चिड़िया घर लाज और बाल उद्यान ।
जलाशय बड़े छोटे तालाब दो दो  वृहद खेल का मैदान ।

चहल-पहल रोज बसाहट में,चल रहा लगता मेला ।
अपने तक सीमित सभी  कई छोटे बड़े झमेला ।
व्यवहार भरी है जीवन शैली, रीतियां नीतियां कहानी ।
रामायण महाभारत पढ़ते सुनते खुशियां भरी जिंदगानी ।

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