जिला - जांजगीर चाम्पा (छ ग)
विषय - एकलव्य
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एक एकलव्य के उदाहरण से, सौ एकलव्य बन जाओ।
उठो युवाओं जाग उठो, मातृभूमि पर समर्पित हो जाओ।
कुछ करो, कुछ कर गुजरो, जग में रोशन नाम हो।
यू ही बैठे-बैठे कही जिंदगी, अंधेरों में न गुमनाम हो।
गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा को गुरु मानकर किया एकलव्य अभ्यास।
नहीं भूला मानव युगों युगों तक, उसकी समपर्ण का इतिहास।
साधना एकत्रित कर, तुम भी नया इतिहास बनाओ।
एक एकलव्य के उदाहरण से, सौ एकलव्य बन जाओ।
द्रोणाचार्य की कूटनीति को, वो महान शिष्य समझ न पाया।
अमर हो गया एकलव्य अपनी गुरुभक्ति से, सबने शीश झुकाया।
जात-पात के अंतर को हराकर, एक नया इतिहास रचाया।
युगों-युगों तक अमर रहेगा, ऐसा नाम कमाया।
आज से नई किरण, नई दिशा, निरंतर प्रयास में लग जाओ।
एक एकलव्य के उदाहरण से, सौ एकलव्य बन जाओ।
बहूत शानदार रचना
ReplyDeleteBahot badhiya
ReplyDeleteVery nice lines
ReplyDeleteबहुत शानदार रचना ।
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