जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - पलाश
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - पलाश की महिमा
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//पलाश की महिमा //
ध्यान लगाकर सुनो साथियों ,
महिमा वृक्ष पलाश की ।
दैवी गुण औषधि प्रदायक ,
शोभा जो मधुमास की ।।
किंशुक टेसू ढाक पलाश ,
विविध नाम से जाने जाते ।
वेद शास्त्र ग्रंथ प्राचीनतम ,
इनकी अद्भुत गाथा गाते ।।
काष्ठ बीज जड़ पत्ते फूल ,
सर्वोपयोगी दिव्य दवाई ।
ब्रम्हा विष्णु शिवजी बसते ,
ऐसे वृक्ष महासुखदायी ।।
दोना पत्तल शुभ है भारी ,
यज्ञ हवन में भी लकड़ी ।
गोंद छाल भी आते काम ,
आयुर्वेद में बड़ी - बड़ी ।।
लाल - लाल टेसू के फूल ,
मानो दहक रहे अंगारे ।
कैसे मैं गुणगान करूँ ,
जो बासंती वन्य सितारे ।।
सर्दी खाँसी चर्म रोग ,
कफ व पित्त शमन करते ।
इन्ही फूल के रंगों से ,
होली धुलेंडी खूब खेलते ।।
यू.पी. का है राजकीय फूल ,
पुष्प पलाशी मनभावन ।
प्रकृति का दैवी उपहार ,
जो मंगलकारी पावन ।।
छोड़ो अब रासायनिक रंग ,
बीमारियों का ये घर है ।
देशी हर्बल रंग गुलाल ,
अपनाओ जो हितकर है ।।
पलाश रंग से होली खेलो ,
गर्मी सहने की क्षमता बढ़ेगी ।
तन - मन स्वस्थ रहेगा वर्ष भर ,
भाईचारा भी निखरेगी ।।
अद्वितीय महिमा पलाश की ,
सब कुछ कहा न जाए ।
भारतीय संस्कृति को मानो ,
विदेशी कल्चर से बाज आएँ ।।
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