Wednesday, March 31, 2021

पुष्पा पटनायक "पुष्प " की रचना- सरहद

रचियता- पुष्पा पटनायक "पुष्प "
बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- छन्द मुक्त कविता
शीर्षक -"सरहदें"
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ज़मी पर लकीरें कितनी भी खींच दें
दिलों में दरारें ना आने पाए ।

इल्तजा है 'पुष्पा' की सरहदों से
रिश्तों को प्यार से सजाए।

गर कोई लांघ भी जाये सरहदें
अपनेपन से क्यूं न हम फूल बरसाएं।

सरहदें बांध देती खुले चमन को 
भूल कर भी बांधें ना मन को ।

स्वच्छंद उड़ना पार सरहदों के 
सबको गले से भी लगाना ।

सरहदें नाम की हो जाएंगी 
दिलों के मिलने से टू जाएंगी ।

याद रखें, बनाने वाले हम ही थे 
सरहदों को, मिटाएंगे भी हम ही ।

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