जिला-रायपुर छतीसगढ़
विषय-बसाहट
विधा-छंदमुक्त कविता
दिनांक -18/03/21
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है ये कौनसा शहर ,कैसी ये आहट है|
शायद ये नए शहर की, नई बसाहट है|
कभी शांति की तमन्ना, कभी सुनसान|
ये नए शहर में आई, नई नई घबराहट है|
शून्य से ईश्वर ,ईश्वर से सृष्टि संरचना,
मानो ये जायसी की कलम अखरावट है|
चौबारे बोलते हैं ,कंगूरे भी बोलते हैं,
इन घरों की आज, कैसी ये बनावट है|
झाड़ियों, पौधों से इतिहास नही बनता,
अमित बनो ऐसा वृक्ष, जैसा कि वट है|
अमिताभ कुमार दीवान
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