ग्राम -बुलाँकी
जिला -रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा -आलेख
विषय-पलाश
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*पलाश*
पलाश को अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे- टेसू ,परसा,ढाक, किसुक ,केसु,ब्रम्ह वृक्ष आदि।
यह हमारे देश के सभी जगहों में प्रायः पाया जाता है यह साधारण वृक्ष के रूप में पाया जाता है। इन की 3 प्रजातियांँ पाई जाती है। कहीं-कहीं लता प्रजाति के टेशु बहुत कम संख्या में दिखाई देता है। पलाश बहुत ही उपयोगी वृक्ष है। पलाश के फूल लाल एवं काली रंग में बहुत खूबसूरत दिखाई देते हैं। लाल रंग होने के कारण इन्हें जंगल का आग भी कहा जाता है। टेसू का फूल दूर से देखने से बहुत मनोहारी लगता है मानव धरती लाल रंग की चुनरी उड़ी है ऐसा प्रतीत होता है। पलाश के पौधों के सभी औषधि के रूप में उपयोगी है यह आयुर्वेदिक जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मानव के लिए बहुत ही उपयोगी देखता है। पलाश का फूल फाल्गुन माह में आता है और चैत माह तक रहता है। टेसू का फूल बहुत है खूबसूरत देखते हैं घुटनों में यह फूल वृक्षों में लगा हुआ बहुत ही आप अच्छा और मनोहारी लगता है। पलाश के जड़ ,तना पता फूल फल औषधि जगत में बहुत कारगर साबित होता है। यह वृक्ष अनेक रोगों के लिए उपयोगी है जैसे चर्म रोग ,बवासीर ,सूजन , हाथी पाँव,
हड्डी की मजबूती,नेत्ररोग,पेशाब संबंधी समस्या आदि। पलाश के फूलों के रंग बनाए जाते हैं एवं गर्मी के दिनों में इसके फूलों से शरबत बनाए जाते हैं जो शरीर की गर्मी को नियंत्रण करता है और गर्मी से बचाता है पलाश के फूलों के और बहुत सारी उपयोग मानव जीवन में होता है। पलाश के फूलों को शंकर भगवान में चढ़ाने की भारतीय संस्कृति में प्रथा है। कार्तिक माह में इसके सूखे फूलों को शंकर जी ने चढ़ाने की परंपरा है। पलाश के फूल मानव जीवन में उपयोगी के साथ-साथ प्रकृति की सुंदरता बढ़ाती है जिस समय टेसू के फूल खिले होते हैं। बहुत ही आकर्षक और सुंदर लगते है ।मानो ऐसा लगता है ,कि धरती ने श्रृंगार किया हो। पलाश हमारे जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी वृक्ष है। इसकी उपयोगिता को बनाए रखते हुए ,इन वृक्षों की संरक्षण और सुरक्षा के प्रति भी हमारा ध्यान जाना चाहिए ।जो हमारे लिए उपयोगी है ,उसकी उपयोगिता को समझते हुए, उसका उपयोग कर हमें तृप्त होनी चाहिए और इनकी संरक्षण सुरक्षा के लिए मानव में जागृत फैलाना चाहिए।
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उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़
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