स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विषय--बसन्त पञ्चमी
विधा--दोहा छन्द
शीर्षक--आयी बसन्त पञ्चमी
०×××××××०
आयी बसन्त पञ्चमी , सुखद रही अपार ।
सुभग जन्मदिन है रहा , सरस्वती अवतार ।।१।।
ज्ञान प्रदाता मातुश्री , हरे मन अँधकार ।
उज्ज्वल करती चेतना , माता करुणागार ।।२।।
मूरख को ज्ञानी बना , करे माँ चमत्कार ।
वरदानी माता रही , जीवन करे उबार ।।३।।
माया मोह हरण करे , भर देती संस्कार ।
हर लेती अज्ञानता , करे ज्ञान संचार ।।४।।
हृदय-भवन में मातुश्री , कर देती उजियार ।
शुभ वर दात्री माँ रही , देती श्रेय विचार ।।५।।
बुद्धि चक्षु को खोलती , लाती सदा निखार ।
करती विवेक में सदा , मातेश्वरी सुधार ।।६।।
राग रागिनी दायिका , करती स्वर संचार ।
बाधा हरती मूर्खता , देती जन्म सँवार ।।७।।
दिव्य चक्षु दे मनुज को , देखे सब संसार ।
वर्तमान सह भूत को , भावी सके निहार ।।८।।
दया - धर्म मन में भरे , समानता उपकार ।
सारे अवगुण दूर कर , भरती गुण भण्डार ।।९।।
विद्या दायक शारदा , विनम्रता शृंगार ।
उससे मिलती पात्रता , धनसंचय का द्वार ।।१०।।
धन पाये से सुख मिले , उससे खुश परिवार ।
सरस्वती पीछे रमा , बनके चले उदार ।।११।।
धर्म-कर्म तब नर करे , मातु दया अनुसार ।
मूरख 'ठाकुर' नित करे , माँ की जयजयकार ।।१२।।
०××××××०
व्याख्या--माता सरस्वती के कृपा के प्रभाव का
सरल शब्दों में वर्णन ।
No comments:
Post a Comment