Monday, February 15, 2021

जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- बसंत पंचमी

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विषय--बसन्त पञ्चमी
विधा--दोहा छन्द 
शीर्षक--आयी बसन्त पञ्चमी
                    ०×××××××०
आयी  बसन्त  पञ्चमी , सुखद  रही अपार ।
सुभग जन्मदिन है रहा , सरस्वती  अवतार ।।१।।
ज्ञान   प्रदाता   मातुश्री , हरे  मन  अँधकार ।
उज्ज्वल करती चेतना , माता    करुणागार ।।२।।
मूरख  को  ज्ञानी  बना , करे  माँ  चमत्कार ।
वरदानी    माता    रही , जीवन  करे  उबार ।।३।।
माया  मोह  हरण  करे , भर   देती  संस्कार ।
हर    लेती    अज्ञानता , करे   ज्ञान   संचार ।।४।।
हृदय-भवन में  मातुश्री , कर  देती उजियार ।
शुभ  वर  दात्री माँ रही , देती  श्रेय   विचार ।।५।।
बुद्धि चक्षु को  खोलती , लाती सदा निखार ।
करती  विवेक  में सदा , मातेश्वरी      सुधार ।।६।।
राग   रागिनी  दायिका , करती  स्वर संचार ।
बाधा    हरती   मूर्खता , देती  जन्म   सँवार ।।७।।
दिव्य चक्षु दे मनुज को , देखे   सब   संसार ।
वर्तमान  सह  भूत  को , भावी  सके  निहार ।।८।।
दया - धर्म मन  में  भरे , समानता   उपकार ।
सारे  अवगुण  दूर  कर , भरती गुण भण्डार ।।९।।
विद्या   दायक   शारदा , विनम्रता      शृंगार ।
उससे  मिलती  पात्रता , धनसंचय  का  द्वार ।।१०।।
धन पाये से  सुख मिले , उससे खुश परिवार ।
सरस्वती   पीछे    रमा , बनके   चले   उदार ।।११।।
धर्म-कर्म  तब नर  करे , मातु  दया  अनुसार ।
मूरख 'ठाकुर' नित करे , माँ की जयजयकार ।।१२।।
                      ०××××××०
व्याख्या--माता सरस्वती के कृपा के प्रभाव का
              सरल शब्दों में वर्णन ।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...