जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-खोज
विधा-कविता (मुक्त छंद)
खोज कर नई सभ्यता
मानव आज विकास
के नव पथ गढ़ चला|
आरुढ़ हो प्रगति के रथ
चाँद की ऊंचाई नाप
अंतरिक्ष को छू लिया|
खोज कर नूतन अन्वेषण
भौतिक सुख तो पा गया
और जग में छा गया|
भूल गया सब रिश्ते- नाते
एकाकी पन ही भा गया
खोज करना आ गया|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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