Wednesday, February 17, 2021

विनोद कुमार "जोगी" के दोहे

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- खोज
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- जोगी के दोहे "खोज"

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मनवा चिंतनशील हो, मनन करे जो रोज।
जग को नव सौगात दे, करके नूतन खोज।।१।।

पुनि - पुनि करें प्रयास जो, लिए खोज की चाह।
सखा आप ही है मिले, मंजिल तक की राह।।२।।

नवल खोज करता सदा, मनुज सोच वरदान।
सदुपयोग ना कर सका, बना मनुज नादान।।३।।

आवश्यकता से हुई, मनुज नवल नित खोज।
वरना ना कुछ काम की, मनु ऊर्जा अरु ओज।।४।।

मनवा नूतन खोज से, मिला हमें आराम।
नवल खोज ने हे सखा, सरल किया हर काम।।५।।

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