स्थान-- नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा--- कविता/आलेख
विषय ---जंगल
शीर्षक -आओ जंगल बचाएं
आओ जंगल की बात करें, कोई न उस पर घात करें ।
उसको भी हर्ष चाहिए, अपने हाथों ही शुरुआत करें ।
जंगल में मंगल नहीं लगता ।
ऐसी क्रिया कलाप हो रही ।
जग को जीवन देने वाली ।
खून की आंसू रो रही ।
इसका विघटन रुके, विकास हो निरंतर सुप्रभात करें ।
तड़प रहे हैं जंगल प्राणी ।
नित उनका हो रही हानि ।
उनके ठौर में मानव बस रहे ।
रुठे रुठे है उनकी कहानी ।
जंगल स्वार्थ की भेंट चढ़ रहे ,जल रहे उन्हें कैसे शांत करें ।
जंगल से वर्षा का आना ।
वर्षा से अन्न का उपजाना।
अन्न से खुशियों का खजाना ।
यज्ञ दान पूजा पाठ आरती ।
कैसे सुरक्षित हो सब कुछ दाता,इसको हम सब ज्ञात करें ।
वह अध्याय हम आज ही खोले ।
जन जन से निवेदन करें और बोले ।
संकट को इसके पास आने न दे ।
जिससे जंगल का मन न डोले ।
जंगल पर हम सर्वस्व लुटाये, नैतिकता से चाहें प्राप्त करें ।
पौधे रोपे जंगल पायें।
खुशी खुशी मंगल गायें ।
मंगल से ही सबका कल्याण ।
मंगल सारे जग फैलायें ।
दुखों के अध्याय को मिल जुल समाप्त करें ।
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