संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ.ग.)
गजल-सृजन
काफ़िया-अरा,रदीफ- न था
दिनाँक-10.02.21
दिल से दिल का रिश्ता गहरा न था,
ढाई आखर आज सुनहरा न था।
बड़े -बड़े जख्म मिले जमाने में,
सनम की जफा से तो उबरा न था।
कभी तो कहीं मिलोगे सोचा था,
मगर वक्त कभी यहाँ ठहरा न था।
उल्फत की बिसात लिए बैठा था,
वफा नाम का वहाँ मोहरा न था।
तुमसे मिलने की लगन मुझे *नलिन*
प्यार पर जमाने का पहरा न था।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,काँकेर,(छ .ग.)
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