Wednesday, February 10, 2021

नलिनी बाजपेयी की गजल

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ.ग.)
       गजल-सृजन
   काफ़िया-अरा,रदीफ- न था
      दिनाँक-10.02.21

दिल से दिल का रिश्ता गहरा न था,
ढाई आखर आज सुनहरा न था।

 बड़े -बड़े जख्म मिले जमाने में,
सनम की जफा से तो उबरा न था।

कभी तो  कहीं मिलोगे  सोचा था,
मगर वक्त कभी यहाँ ठहरा न था।

उल्फत की बिसात लिए बैठा था,
वफा नाम का वहाँ मोहरा न था।

तुमसे मिलने की लगन मुझे *नलिन*
प्यार पर जमाने का पहरा न था।

      नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,काँकेर,(छ .ग.)

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