जिला:-कांकेर(छ. ग.)
विधा:-छंद मुक्त कविता
विषय:-जंगल
शीर्षक:-लोमड़ी जी की पार्टी
लोमड़ी जी की पार्टी में,
हुए सब नाराज।
क्योंकि कंजूस लोमड़ी था,
बहुत बदमाश।
एक किलो आलू था,
एक किलो प्याज।
मेहमान बुलाया उसने,
हजार के आस पास।
बंदर थे रसोइए उन्होंने कहा,
इतने कम सामान से,
कैसे पेट भरेगा आज।
पार्टी में खास मेहमान थे,
शेर महाराज।
शेर ने कहा,
आलू मैं नहीं खाता,
बनाओ कुछ खास।
वरना तुम्हे खाऊंगा आज।
लोमड़ी ने शेर को बनाया
बेवकूफ ,कहा
आलू की सब्जी चखिए महाराज,
इसे अगर खाएंगे,
तो सब बन जाएंगे दास।
शेर जी तो मान गए,
अब उसने सोचा,
कैसे मानेंगे नागराज।
उपाय निकालने में
माहिर था लोमड़ी चालबाज।
नागराज से कहा-
आपके लिए बनेगा,
आलू का सूप खास।
जिससे आपके जहरीले
बनेंगे दाँत।
अब खरगोश बोला,
हमें गाजर ही खाना आज।
लोमड़ी बोला,
गाजर आप रोज खाते।
कंद का राजा है आलू,
इसे खाइए आज।
चखोगे तो रोज करोगे जाप।
इसी तरह राजी किया सबको,
लोमड़ी ने आलू खाने आज।
-कु.गरिमा पोयाम
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