Friday, February 26, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- सरो

नाम ----गिरधारी लाल चौहान
स्थान--- नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता
विषय ----सरो
शीर्षक ---सरो को देखने आइए

सरो भी लगाएंगे  हम, इस बगीचे में ।
अभी अभी पहुंचे हैं,इस नतीजे में ।

सरो से चार चांद होगा ,लोग कहते हैं ।
एक नई प्रयोग दिखेगा,इस बगीचे में ।

अनगिनत फूल हैं,चम्पा चमेली मोंगरा ।
इसे भी देखने आएंगे सब,इस बगीचे में ।

बरगद पीपल आम तो,हर जगह होते ।
कुछ तो अलग  रहेगा,  इस बगीचे में ।

इसी को देखने लोगों की,भीड़ बढ़ेगी ।
लोगों का आना-जाना होगा,इस बगीचे में ।

सबकी चर्चा हो न हो,इसकी चर्चा होगी ।
लोगों की भीड़ लग जाएगी इस बगीचे में ।

पहले जो देखेंगे इसे, इसका नाम पूछेंगे ।
सरो का नाम बताएंगे,इस बगीचे में ।

सबसे अलग सुंदर, दूर से दिखने वाला ।
इसे लोग कहेंगे अब देखना,इस बगीचे में ।

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