Thursday, February 18, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- नवीनीकरण

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-नवीनीकरण
विधा-कविता (मुक्त छंद)

नव दल ,नव किसलय
   प्रकृति ने धरे नव रुप।

नवीनीकरण कर नभ में
   रंग दिए सूरज  ने धूप।

समय के संग हर वस्तु
   नूतन रुप में ही भाता है ।

भवन भी रंग- रोगन से ही
  नव रंगो से सज जाता है ।

 नवीनीकृत संसाधन भी तो
   बहुत सुंदर बन  जाता है ।

प्रकृति का नव रुप जग को
   बसंत मय कर जाता है ।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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