जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-आकाशगंगा
विधा-कविता (मुक्त छंद)
आकाशगंगा में असंख्य
टिमटिमाते सितारे ,
बचपन में कौतुहल होता
गिनते थक जाते ।
सप्त ऋषि और ध्रुव तारा
सबसे लगते प्यारे ।
टूटते हुए तारे से विश मांग,
हो जाते न्यारे -न्यारे।
चाँद से बातें कर संदेशा देना
कि मेरे पापा को बताना ।
उनकी बहादूर बेटी पास हो गई,
बहुत अच्छा ही लगता ।
बड़े हुए तो जान पाये नक्षत्रों को,
उनके रहस्यों की बातें ।
आकाशगंगा की रोचक कहानियाँ
नक्षत्र,ग्रह और उपग्रहों को ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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