ग्राम - बुलाकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा - कविता
विषय - *विरहिणी*
शीर्षक - *ज्ञान की तड़प*
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*ज्ञान की तड़प*
तेरे बिना जीवन सुनी है मेरी,
अतृप्त हो ढूंढ रही नैनन मेरी।
कब मिल पाऊं तुझे आश हे मेरी,
तेरी ध्यान में मन लगा है मेरी।
तुझे बिना जीवन अतृप्त है मेरी,
तृप्त कब होगा आत्मा मेरी।
तू सर्वव्यापी, स्थूल चक्षु मेरी,
दर्शन न होता, सूक्ष्म स्वरूप तेरी,
तेरी अभाव में समस्या है जिंदगी,
तेरी दर्शन कब हो, हे प्रेम मेरी,
तेरी दर्शन वास्ते भवसागर आई।
तुझे ना देख मैं हूं घबराई।
तेरी खुशबू की बू मिल नहीं पाई,
बिना खुशबू के मैं हूं व्याकुलाई।
कब दर्शन होगा ये प्रेम मुझको,
कब मिल पाऊं हे, प्रेम तुझको।
तेरे मिलन से उपलब्धि है मेरी,
तुझे ढूंढ रही हूं जीवन सारी।
तेरे व्याकुलता से जिया नहीं जाता,
तेरी यादों से अब रहा नहीं जाता।
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उर्मिला सिदार
रायगढ़ छत्तीसगढ़
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