जिला:-कांकेर(छ. ग.)
विधा:-छंद मुक्त कविता
शीर्षक:-तुम्हारे वजूद को तुमने जाना नहीं
तुम्हारे वजूद को तुमने जाना नहीं,
स्वयं को तुमने पहचाना नहीं।
जिंदगी एक मिलती है,
इसे गवाना नहीं।
दूसरों के नजरिये से,
स्वयं को आजमाना नहीं।
तुम वो योद्धा हो,
जो जंग जीत सकते हो।
चाहो तो रहो जमीं पर,
चाहो बुलंदियाँ छू सकते हो।
आफतों से डरते हो तुम,
तुम्हें तो मुसीबतों को हराना है,
उनसे लड़ना है,मस्कुराते हुए
और लक्ष्य को पाना है।
तुम हो चाँद छूने के काबिल,
जमीं पर बैठे तारे न गिनते रहो,
कर लोगे लक्ष्य हासिल।
बस उस तक पहुंचने के
प्रयासरत रहो।
नकारात्मक बातें सुन,
हौसला न हारो तुम।
क्यूँ पाना है लक्ष्य याद करो,
देखना छोड़ दोगे रहना गुमशुम।
तुम्हारे वजूद को तुमने
अब तक जाना नहीं,
स्वयं को तुमने जाना नहीं।
जिंदगी एक मिलती है,
इसे गवाना नहीं।
दूसरों के नजरिये से,
स्वयं को आजमाना नहीं।
-कु.गरिमा पोयाम
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