स्थान--नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ----कविता/आलेख
विषय---संवादिका
शीर्षक--चींटी का जीवन
वाह -वाह चींटी का जीवन ।
कभी नहीं एकाकीपन ।
साथ में चलती, साथ में रुकती ।
साथ- साथ भोजन ।
वाह --वाह चींटी का जीवन।
जब चलती है तार सी दिखती ।
लगी हुई है कामों में ।
कभी न देखा अलग -थलग।
न देखा आरामों में ।
संख्या-बल में मेला जैसे,सड़क हो या उपवन ।
वाह --वाह चींटी का जीवन ।
जीवन चलता कई कामों से ।
सबको वह कर लेती है ।
बच्चों की देखभाल से लेकर ।
अपना कष्ट हर लेती है ।
धूप,छाया,वर्षा,आंधी,सब सहने की उसमें शक्ति ।
पृथ्वी का सबसे लघु प्राणी,मानव के लिए उदाहरण ।
वाह-वाह चींटी का जीवन ।
कई रंगों की यह रानी ।
इनके भी की दास दासियां ।
इनके भी प्रजा साम्राज्य अटल ।
प्रेम ही प्रेम इनमें,कभी नहीं लड़ाइयां ।
कहीं भी धरो पांव धरा में,हो जायेगा मिलन ।
वाह -वाह चींटी का जीवन ।
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