जिला - बलौदाबाजार ( छत्तीसगढ़ )
विषय - नई सुबह 2021
विधा - मुक्त छंद कविता
शीर्षक - 2021 की सुबह
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// 2021 की सुबह //
चला गया ईसवी सन् बीस ,
देकर कड़वे - मीठे अनुभव ।
जो बीत गया उसको भुला दें ,
आगे बढ़ें जहाँ गंतव्य ।।
आया अंग्रेजी नूतन वर्ष ,
सन् दो हजार इक्कीस ।
आप सभी को बधाई हो ,
मिले प्रभु का मंगल आशीष ।।
सुबह रोज ही होता है ,
किन्तु आज कुछ नया करें ।
इक्कीसवीं सदी का सन् इक्कीस ,
मानवता की सेवा करें ।।
दीन - दुःखी असहायों की
उपकार में जीवन अर्पित करें ।
आओ नए साल में हम सब ,
दुर्गुण - दोष विसर्जित करें ।
कोरोना को जड़ से मिटाएँ ,
यह भी लें संकल्प सभी ।
पिछले वर्ष की पुनरावृत्ति ,
भविष्य में होए न कभी ।।
नर और नारी हर मानव ,
स्वस्थ सुखी सम्मानित हों ।
सत्य प्रेम न्याय करुणा की ,
देवी उर में विराजित हो ।।
नव वर्ष की उमंग में ,
भूलें नहीं निज संस्कृति ।
भारत के रहने वाले हैं ,
हो शुद्ध भारतीय जीवन - पद्धति ।।
" वसुधैव कुटुम्बकम् " की भावना ,
जियो और जीने दो ।
नये साल में ज्ञान-भक्ति-सत्संग रस ,
पियो और पीने दो ।।
जिस देश - धर्म में जन्म हुआ ,
हम उसका मान बढ़ायेंगे ।
जिस थाली में हम खाते हैं ,
उसमें न कभी भी छेद करेंगे ।।
नए साल की सुबह हमेशा ,
ऐसा हो हम चाहते हैं ।
सन् दो हजार इक्कीस में ,
सबको हमारा नमस्ते है ।।
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