स्थान ----नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ----जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ---कविता /आलेख
विषय --पगडंडी
शीर्षक--- पगडंडी अब रास्ते
पगडंडी अब रास्ते नजर नहीं आते ।
पगडंडी पर आना जाना खबर नहीं आते ।
लोगों का अब पैदल चलना,ठहर सा गया है ।
जो दिल में बसता था कभी,उतर सा गया है ।
पगडंडी गांवों की धड़कन, शहर नहीं पाते ।
पगडंडी को कुछ लोगों ने, भूला ही रखा है ।
आज की भागम भाग, माहौल बना रखा है ।
पैदल वाले बनकर कोई,सफर नहीं जाते ।
पगडंडी किताबों में ,मिलती कहानियों में ।
इधर उधर बतलाते ,कुछ बचे निशानियों में ।
जो पगडंडी को हमेशा, जग मेंअमर है बनाते ।
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