स्थान---नवापारा खुर्द ,सक्ति
जिला---जांजगीर चाम्पा छत्तीसगढ़
विधा---कविता/आलेख
विषय---शहद
शीर्षक----शहद पुष्पों का रस
शहद पुष्पों का रस, जीवन को बलवान बनाए ।
मधुमक्खियों की परिश्रम, इसमें नजर आए ।
इसका मिलना सहज नहीं, जोखिम से भरपूर ।
जंगलों में पर्वतों में, कभी मिलते पहुंच से दूर ।
कुछ मानव निर्मित भी, गांव शहर नजर आए ।
मानव जिसे पाकर, अपना हित साधे ।
हैं आयुर्वेद औषधि,मिटाए लाखों ब्याधे ।
देवों के सिर चढ़े,शिव शिवा अभिषेक कराए ।
शहद चीनी की तरह, स्वाद में यह मीठापन ।
जैसे इसका गुण स्वाद,हो मानव का जीवन ।
मानव मानव को देख हो आकर्षित दूर न जाए ।
शहद हमारी पहुंच में, गुण विधान से परिचित ।
जीवन में करें उपयोग, मिले सलाह उचित ।
मुट्ठी भर शहद के लिए,कभी जान न जाए ।
आज का मानव उपयोग कम, दुरुपयोग पर उतारु है ।
उपयोगी से अनुपयोगी, करने का काम उसका जारी है ।
वर्तमान के चक्कर में,आने वाला भविष्य न बिगड़ जाए ।
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