जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
विषय - भूख
विधा - आलेख
शीर्षक - ज्ञान की भूख
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// ज्ञान की भूख //
भूख या क्षुधा का अनुभव सभी प्राणी करते हैं । इसकी तृप्ति और पूर्ति के लिए हर एक जीव - जन्तु अंतिम साँस तक लगा रहता है । लेकिन यह भूख शरीर की भूख है , पेट की भूख है जो जीवित रहने के लिए आवश्यक है । इसके अतिरिक्त एक और भूख है जिसे ज्ञान का भूख या मानसिक भूख कहते हैं । हम इसे मन या मस्तिष्क का भोजन भी कह सकते हैं । वैसे तो धरती के प्रायः सभी जीवों में यह मानसिक या ज्ञान की भूख थोड़ी - बहुत पाई जाती है किन्तु मनुष्य में ज्ञान की भूख सर्वाधिक है , अमाप है , अनन्त है । वास्तव में यही भूख मनुष्य के चहुँमुखी विकास व उसकी श्रेष्ठता का मूलाधार है क्योंकि ज्ञान जीवन व सृष्टि के रहस्यों और समस्याओं का अंतिम समाधान है ।
ज्ञान की भूख ही मनुष्य को अन्य जीवधारियों से अलग करती है । इसी भूख के चलते विश्व के बड़े - बड़े वैज्ञानिक , डॉक्टर , वकील , चिंतक , दार्शनिक , प्रोफेसर , नेता , अभिनेता , विद्वान , साधु , सन्त , ऋषि , मुनि , कवि , लेखक आदि मनीषीगण आश्चर्यजनक कार्य करते हैं और मानवीय उत्कर्ष को निरंतर गौरवान्वित करते रहते हैं । कम्प्यूटर , मोबाइल , इंटरनेट आदि असंख्य आविष्कार ज्ञान की भूख के बिना असंभव तो क्या कल्पना भी नही कर पाते । यही ज्ञान की महिमा व गरिमा है
ज्ञान की भूख का लक्षण है - क्या ? क्यों ? कैसे ? आदि प्रश्नों का उत्तर । नन्हा बालक जिज्ञासा व ज्ञान की भूख के कारण ही सब कुछ सीखता रहता है । अतः ज्ञान की भूख मनुष्य के लिए सर्वोपरि है ।
भूख लगे तो ज्ञान का ,
ज्ञान मिले तो आत्मा का ।
सुख मिले तो भक्ति का ,
भक्ति मिले तो परमात्मा का ।
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