जिला--कोरबा
विषय--अश्क
विधा--कविता
शीर्षक–अश्क
---लिखना चाहती हूँ अश्कों पर ,
मगर मेरी लेखनी है नहीं चलती,
अल्फाजों के चट्टानों से झरते झरनों को किन शब्दों से बयां करती।
फिर भी इतना कहूँगी अश्कों से ---
आँखों से गिरते बूँदों को पलकों में संजो लिया करो ,
इन पलकों की तटों में समुंदर समा लिया करो ।
कौन दे पाऐगा यहाँ कीमत इन अश्कों की ,
इस बेशकीमती बूंदों को आँखों में भर कर रखा करो ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छत्तीसगढ़
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