जिला :- महासमुंद
विषय :- कहार
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- जोगी के दोहे "कहार"
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कश्यप कुल के हैं सखा, वंशज सभी कहार।
बाराती के साथ में, चलें लिए वे भार।।१।।
लिए पालकी कांध में, चलें सखा वे चार।
नेह भाव उर में लिए, बांटे निज के भार।।२।।
लंबी दूरी तय करें, होती सखा थकान।
छाया में विश्राम कर, करते थे जलपान।।३।।
रोती दुल्हन देख कर, गाते थे वे गीत।
बोझिल मन हल्का करें, भरे हृदय में प्रीत।।४।।
सनै - सनै बदला सखा, देखो यह परिवेश।
खोकर अपनी अस्मिता, बदल लिया निज वेश।।५।।
डोली खोई भूत में, दुल्हन लाते कार।
बदली रीति रिवाज है, खोए कहीं कहार।।६।।
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