Thursday, January 28, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- छेरछेरा

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
    संबलपुर, जिला-कांकेर,(छ. ग.)
       विषय-छेरछेरा,
            दिनाँक-28.01.21
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              *छेरछेरा*

पौष पूर्णिमा का दक्षिण 
कौशल में बड़ा मान,
तीज-त्यौंहारों,और 
रीति-रिवाजों का बड़ा खान।

अन्न भरे खलिहानों में 
छेरछेरा का पर्व है मनाते,
बड़े,बूढ़े,बच्चे हर्षित हो 
घर-घर इस पर्व का अलख जगाते।

जहाँ से जो अन्न,द्रव्य मिलता,
आशीषों का बौछार लगाते,
हँसी-खुशी से भरे चेहरों पर 
उल्लास भाव जगाते।

बड़ा पावन पर्व है,
प्रेम,सौहार्द्र,घर-घर फैलाते,
पुराणों में दिन पुनीत तीर्थों 
पर कल्पवास का धूम मचाते।

मैया शांकभ्भरी का यह पर्व 
अद्भूत रूप दिखाते,
दान-पुण्य की महिमा भारी 
ये बात है बताते।

     नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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