स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"नई सुबह"
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नई सुबह नहीं जिंदगी
नया-नया सा लगे जहां
मुस्कुराते चेहरे दिखे
नजर ना लगे किसी को यहां ।
सूरज उग, कुछ कह रहा
निरंतर आगे कदम बढ़ाओ
रात गई बात गई
मेरी किरणों संग मुस्कुराओ ।
नई रंग लाई है किरणें
आंखों में अरमान जगाओ
जीवन को नई दिशा देकर
दुनिया को रंगों से सजाओ।
बीता हुआ सब विसार कर
रंज छोड़, मित्रता बढाओ
नई सुबह गुजरने से पहले
अपनों को गले से लगाओ।
नई आशा और विश्वास से
भर लो हृदय का कोना
औरों के चेहरे पर हंसी लाकर
करलो जीवन को ही सोना ।
Very nice pushpa
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