Friday, January 1, 2021

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- नई सुबह

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-नई सुबह 2021
विधा- (कविता)मुक्त छंद

नई सुबह 2021 का उगता सूरज,
प्रगति का नया संदेशा लेकर आये
आज की शाम का ढलता  सूरज,
सफलता का  नया संदेशा दे जाए

रोशनी से नहायी नई -नई सुबह हो
 करोना का भय न  ही आतंक  हो
हर मानव   के नव सपनें   पूर्ण हों
मेरे शहर  में भाई चारा,अमन हो।

रक्तिम आभा युक्त सूर्य कहता है,
न डर तिमिर से चीर कर तम को
उठ  झिलमिल सितारों को देख,
तुझे ही देखकर चमचमा रहे हैं ।

बढ़ उगते सूरज के संग ही चल,
हो सके तो सूरज स पहले जाग
अपने सोये मन को  जल्द जगा ,
आ चल सूरज से आगे निकल।।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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