जिला :- महासमुंद
विषय :- अश्क
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- जोगी के दोहे ( आँसू )
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जब जाता मनवा सखा, संघर्षों से टूट।
तब - तब नैनों से सदा, मोती जाते छूट।।१।।
आँसू जोगी होत है, मनुज भाव उद्गार।
इनके बहने से सदा, कम होते मनुभार।।२।।
आँसू मोती एक से, होत बड़े अनमोल।
भावों के सैलाब में, बहते पट को खोल।।३।।
मनवा नैनन में भरे, सागर रूपी भाव।
बहते अविरल ये तभी, जब हो उर में घाव।।४।।
आँसू सागर एक सा, इक जैसा है स्वाद।
खारे पन बस है सखा, इसमें घुला मवाद।।५।।
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