Saturday, January 2, 2021

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- शहद

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विधा--कविता
शीर्षक--शहद 
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शहद अमृत समान रहा , गुण  से   है   भरपूर ।  
इसका सेवन  नित करें , करे   रोग   को    दूर ।।१।।
शहद  बने  मकरंद   से , मधु  प्रसून का  सार ।
करे सुदृढ़ यह  देह  को , होता       बलदातार ।।२।।
शहद दूध  प्रातः  मिला , जो  करता  है   पान ।
माँस  वृद्धि मधुरस करे , रहा   परीक्षित  जान ।।३।।
शहद संग है जल मिला , करते    प्रातः   पान ।
अति   मोटापा  दूर   हो , करता  वसा  निदान ।।४।।
शहद अगर  सेवन  करे , कोई   औषधि   संग ।
औषधि का है  गुण बढ़े , लगता   खाना   अंग ।।५।।
शहद पान जो नित करे , चमके  तन  का  चर्म ।
सुन्दरता   बढ़ता   सदा , इसका शुभ गुण धर्म ।।६।।
शहद करे मन बुद्धि का , निश्चय  सदा विकास ।
शरीर  भी   चंचल  बने , हरता  मन  का  ह्रास ।।७।।
शहद  बढ़ाये  दृष्टि  की , सदैव   भारी   शक्ति ।
आँखों   में  अंजन  करे , यदि  है कोई  व्यक्ति ।।८।।
शहद संग में गरम जल , करता    कोई    पान ।
विष बन जाता है शहद , पहुँचाता     नुकसान ।।९।।
शहद का  गुण  गरम है , कहता        आयुर्वेद ।
इसका  सेवन तब  करें , जाने    प्रयोग     भेद ।।१०।।
शहद बने  परसाद  भी , ईश्वर     लेते     भोग ।
हरण करे  निश्चय शहद , तन - मन का है  रोग ।।११।।
शहद  नींद  लाया  करे , रजनी  में   कर  पान ।
अति गुणकारी यह रहा , कह  'ठाकुर'  नादान ।।१२।।
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व्याख्या--शहद के कुछेक गुणोंपर प्रकाश डालने
              का प्रयास किया गया है ।

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