स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विधा--कविता
शीर्षक--शहद
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शहद अमृत समान रहा , गुण से है भरपूर ।
इसका सेवन नित करें , करे रोग को दूर ।।१।।
शहद बने मकरंद से , मधु प्रसून का सार ।
करे सुदृढ़ यह देह को , होता बलदातार ।।२।।
शहद दूध प्रातः मिला , जो करता है पान ।
माँस वृद्धि मधुरस करे , रहा परीक्षित जान ।।३।।
शहद संग है जल मिला , करते प्रातः पान ।
अति मोटापा दूर हो , करता वसा निदान ।।४।।
शहद अगर सेवन करे , कोई औषधि संग ।
औषधि का है गुण बढ़े , लगता खाना अंग ।।५।।
शहद पान जो नित करे , चमके तन का चर्म ।
सुन्दरता बढ़ता सदा , इसका शुभ गुण धर्म ।।६।।
शहद करे मन बुद्धि का , निश्चय सदा विकास ।
शरीर भी चंचल बने , हरता मन का ह्रास ।।७।।
शहद बढ़ाये दृष्टि की , सदैव भारी शक्ति ।
आँखों में अंजन करे , यदि है कोई व्यक्ति ।।८।।
शहद संग में गरम जल , करता कोई पान ।
विष बन जाता है शहद , पहुँचाता नुकसान ।।९।।
शहद का गुण गरम है , कहता आयुर्वेद ।
इसका सेवन तब करें , जाने प्रयोग भेद ।।१०।।
शहद बने परसाद भी , ईश्वर लेते भोग ।
हरण करे निश्चय शहद , तन - मन का है रोग ।।११।।
शहद नींद लाया करे , रजनी में कर पान ।
अति गुणकारी यह रहा , कह 'ठाकुर' नादान ।।१२।।
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व्याख्या--शहद के कुछेक गुणोंपर प्रकाश डालने
का प्रयास किया गया है ।
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