जिला--कोरबा
विषय--मल्लाह
विधा-कविता
शीर्षक-मल्लाह
-------ऐ मल्लाह ! है धन्य तेरा ओहदा ,
पार लगाए कितनों को मगर, लहरों में रहे तू सदा ।
तूफानों को मोड़ दिया तूमने,
है धन्य तेरा पतवार,
लाखों का जीवन बचाते हो तुम ,
मगर, तेरी जिंदगी का नहीं ऐतबार ।
सागर पार कर जाते हैं, चले जाते हैं दूसरे द्वीपों को ,
दे देते हैं दो पैसा मगर, पलटकर नहीं देखते एक बार ।
ऐ मल्हार! है धन्य तेरा ओहदा, पार लगाए कितनों को मगर, लहरों में रहे तुम सदा ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छत्तीसगढ़
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