Wednesday, January 27, 2021

गरिमा पोयाम की रचना- संवादिका

कवयित्री:-कु.गरिमा पोयाम
जिला:-कांकेर (छ. ग.)
विषय:-संवादिका
शीर्षक:-नन्ही सी चींटी को देखो

नन्ही सी चींटी को देखो,
हर पल बढ़ती जाती है।
न थकती न रुकती तब तक,
जब तक विजय न पाती है।
पहली चींटी गंध छोड़ती,
तब दूसरी पीछे चलती है।
पथ में अगर रुकावट आये,
पुनः गंध पहचान आगे बढ़ती है।
नन्ही सी है जान देखो,
कितना परिश्रम करती है।
कभी लांघती दीवार,
तो कभी पहाड़ चढ़ती है।
देह इसकी इतनी छोटी,
पर कभी न विश्राम करती है।
जब देखा आगे बढ़ते देखा,
कभी न शिकायत करती है।
हम मानव भी सीखें इससे,
कठिन परिस्थिति में आगे बढ़ना।
भाई-चारा का भाव रखें हम,
सीखें इनसे मिलकर चलना।
          -कु.गरिमा पोयाम
           कांकेर(छ. ग.)

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