सुंदरगढ़, ओडिशा
विधा-मुक्त काव्य
विषय-समंदर का किनारा
गुमशुम सी मैं
हिलोरें लेता सागर
तन्हा सी मैं
हौसला देता सागर
चिर परिचित सा गोद
समंदर का किनारा
शांत बैठी मैं
हलचल मचाता समंदर
मैं रेंत पे यादें उकेरती
वो यादें बहा ले जाता
कुछ तो प्रेरणा देता है
समंदर का ये किनारा
कोलाहल भरे इस जीवन को
विश्राम देता सागर
भटकते पथिक के मन को
सुकून पहुँचता सागर
बोझिल तन -मन को
उत्साह से भर जाता
अपनी विशालता में
सब कुछ समेट लेता
माँ की गोद सा ही सुकून
पहुँचता समंदर का किनारा।
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