जिला :- महासमुंद
विषय :- समंदर का किनारा
विधा :- मनहरण घनाक्षरी
शीर्षक :- साहिल की आस है।
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जीवन के सागर में,
फंसा मनु भंवर में,
बेड़ा के भरोसे सखा,
साहिल की आस है।
पतवार हाथ लिए,
हौसलों को साथ लिए,
निज भुज बल से जी,
साहिल की आस है।
मंजिल है दूर दिखे,
अंत जी समीप दिखे,
मृत्यु के ही भय से जी,
साहिल की आस है।
तन में थकान नहीं,
मन में है जान वहीं,
निरंतर बढ़ना है,
साहिल की आस है।
बगिया खिलेगी सखा,
मंजिल मिलेगी सखा,
निज पे भरोसा रखे,
साहिल की आस है।
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