पिता- सुखराम सिंह
माता- कलमा देवी
शिक्षा- उद्यानिकी विज्ञान में स्नातकोत्तर
रचना- विधा..कविता
विषय- सही ग़लत
वक़्त के साथ अमूमनसबकुछ बदल जाता है
रिश्ते नाते,रिश्तेदारी ख़्वाब, सपने, जिम्मेदारी।
कल तक जो धर्म था, नैतिकता थी
आज अधर्म, अनैतिक हो सकता है
खुद को दायरों में ना जकड़ सुन
तू सब कुछ खो सकता है।
मूड के देख,कल जो सही थाआज ग़लत है।
कल था जो समाआज अलग है।
नरबलि कल सही थीआज नहीं।
स्त्री शिक्षा कल वर्जित थीआज नहीं।
बहुपत्नी विवाह कल सही था, आज नहीं
विधवा विवाह कल अनैतिक थाआज सही।
सही ,गलत, नैतिक,अनैतिक सामाजिक कायदे।
बने हर युग में देखे कुछ लोगो ने अपने फायदे।
तर्क से समसामयिक प्रश्नन सम्हल सकता है।
हिम्मत,हौसले से तू इतिहास बदल सकता है।
रंजना मखीजा
अकलतरा
Bahut sunder panktiya 👏👏
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