Monday, January 4, 2021

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- पगडंडी

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ.ग.)
विषय - पगडंडी
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - पगडंडी और राजमार्ग
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       // पगडंडी और राजमार्ग //

झूठ कपट अन्याय अनीति ,
अधर्म की पगडंडी छोड़ो ।
सत्य न्याय और नीति धर्म के ,
राजमार्ग पर सीधा दौड़ो ।।

टेढ़ी - मेढ़ी ऊबड़ - खाबड़ ,
पगडंडी पर क्यों चलना ?
पक्की सीधी सड़क छोड़कर ,
इधर - उधर मत कभी भटकना ।।

प्रेम दया उपकार की राहें ,
जीवन को सफल बनाती है ।
लोभ मोह और स्वार्थ मनुज को ,
अंत में खूब सताती है ।।

पगडंडी अनजाना पथ है ,
खतरे से खाली नहीं ।
जिस पथ से पाते मंजिल सब ,
वही निरापद वाली सही ।।

शास्त्र संत महापुरुषों से ,
चलित पंथ अनुकरणीय हैं ।
रावण कंस हिटलर की पगडंडी ,
घोर कँटीली अवांछनीय है ।।

धर्म और मानवता का पथ ,
राजमार्ग ही होता है ।
भले छोटी सी पतली पगडंडी ,
मंजिल तक तो पहुँचाता है ।।

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