जिला - बलौदाबाजार ( छ.ग.)
विषय - पगडंडी
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - पगडंडी और राजमार्ग
*******************************
// पगडंडी और राजमार्ग //
झूठ कपट अन्याय अनीति ,
अधर्म की पगडंडी छोड़ो ।
सत्य न्याय और नीति धर्म के ,
राजमार्ग पर सीधा दौड़ो ।।
टेढ़ी - मेढ़ी ऊबड़ - खाबड़ ,
पगडंडी पर क्यों चलना ?
पक्की सीधी सड़क छोड़कर ,
इधर - उधर मत कभी भटकना ।।
प्रेम दया उपकार की राहें ,
जीवन को सफल बनाती है ।
लोभ मोह और स्वार्थ मनुज को ,
अंत में खूब सताती है ।।
पगडंडी अनजाना पथ है ,
खतरे से खाली नहीं ।
जिस पथ से पाते मंजिल सब ,
वही निरापद वाली सही ।।
शास्त्र संत महापुरुषों से ,
चलित पंथ अनुकरणीय हैं ।
रावण कंस हिटलर की पगडंडी ,
घोर कँटीली अवांछनीय है ।।
धर्म और मानवता का पथ ,
राजमार्ग ही होता है ।
भले छोटी सी पतली पगडंडी ,
मंजिल तक तो पहुँचाता है ।।
---#---#---#---
No comments:
Post a Comment