जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - राब्ता
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - प्रभु से लगाव
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// प्रभु से लगाव //
प्रभु से रिश्ता ,
प्रभु में भक्ति ,
प्रभु से प्रीति ,
मिले मन की शांति ।
प्रभु से सम्बंध ,
प्रभु में आसक्ति ,
प्रभु सच्चे बंधु ,
प्रभु निमित्त प्रवृत्ति ।
प्रभु में प्रेम ,
प्रभु की सेवा ,
प्रभु का भजन ,
मिठाई मेवा ।
प्रभु को समर्पण ,
प्रभु का ध्यान ,
जप और कीर्तन ,
कर्तव्य महान ।
प्रभु की महिमा ,
लीला गुणगान ,
प्रभु में निष्ठा ,
करे कल्याण ।
प्रभु का स्वरूप ,
सत् चित् आनंद ,
अजर अमर शाश्वत ,
प्रभु तो निर्बन्ध ।
प्रभु की प्रार्थना ,
प्रभु से सम्पर्क ,
भावों की शुद्धि ,
प्रभु कथा सत्संग ।
करुणा की खान ,
दया के सागर ,
प्रभु ही हितैषी ,
माता पिता गुरुवर ।
प्रभु से कर लो ,
सच्ची सगाई ,
यही जीवन की ,
ठोस कमाई ।
हृदय से पुकारो ,
प्रभु के हो जाओ ,
प्रभु के लिए ही ,
प्रभु को रिझाओ ।
प्रभु तो अपने हैं ,
परम निज सुहृद ,
दिल की प्याली में ,
पियो प्रभु का अमृत ।
प्रभु की कृपा से ,
मिटे जग व्यथा ,
सर्वत्र व्यापित ,
प्रभु की सत्ता ।
जीवन की गाड़ी ,
प्रभु के हवाले ,
केवल तू प्रभु को ,
अपना बना ले ।
यही एक सार है ,
प्रभु - भक्ति पूँजी ,
सर्वस्व पाने का ,
मास्टर कुंजी ।
प्रभु में लगन हो ,
प्रभु से लगाव ,
जीने - मरने का ,
सत्य सफल दाँव ।
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