निवासी:-कांकेर(छ. ग.)
विषय:-शिक्षक
शीर्षक:-वहाँ वो शिक्षिका थीं
विधा:-छंद मुक्त कविता
मैं पढ़ती थी जिस विद्यालय में,
वहाँ वो शिक्षिका थीं,
कहते हम जिन्हें दीदी जी।
थीं वो बड़ी दबंग,
होता अगर कोई उदंड।
उसे सबक सिखाती थी,
अच्छे से डांट लगाती थीं।
बाहर से बड़ी कठोर,
पर नरमदिल वाली थीं।
बच्चों को दीदी-भइया कहतीं,
विद्यालय था मंदिर जैसा,
पुस्तक थे भगवान,
तो वो वहाँ की आरती थीं।
नाम था उनका,
श्रीमती सुप्रिया।
जिन्होनें हमें पढ़ाया,
प्रेम भी दिया।
मैं पढ़ती थी जिस विद्यालय में,
वहाँ वो शिक्षिका थीं,
हम कहते जिन्हें दीदी जी।
-कु.गरिमा पोयाम
कांकेर(छ. ग.)
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