स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विषय--क्या होती है कविता
विधा--कविता
शीर्षक--चिन्तन कविता का आधार
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कविता होती है निश्चय ही , विचार का उद्गार ।
रहा शोक से उसका नाता , चिन्तन है आधार ।।
अथवा मन हर्षित होता है , छा जाता आनन्द ,
तभी जन्म कविता लेती है , बन जाते हैं छन्द ।
हर्ष - वेदना ही लेते हैं , कविता का आकार ।।
रहा शोक से उसका नाता , चिन्तन है आधार ।।१।।
मन को घटना मथ देती है , करें जब दृष्टिपात ,
करुणा जागृत होती मन मेंं , मिलते जब आघात ।
मुरदे में कर देती कविता , जीवन का संचार ।।
रहा शोक से उसका नाता , चिन्तन है आधार ।।२।।
भरी वीरता कविता मेंं है , देश करे आजाद ,
जंजीर गुलामी की तोड़े , करे वतन आबाद ।
टिके नहीं कविता के आगे , तोप - तीर -तलवार ।।
रहा शोक से उसका नाता , चिन्तन है आधार ।।३।।
नवाचार कविता लाती है , मिटा अंधविश्वास ,
अंधकार मन का हरती है , भरती नवल उजास ।
जागृति कविता से आती है , लाती हृदय निखार ।।
रहा शोक से उसका नाता , चिन्तन है आधार ।।४।।
कविता भावों की धारा है , पावन गंगा नीर ,
सदा आनन्द मन मेंं भरती , हर लेती है पीर ।
कवि के अंतर्मन मेंं उछले , खेलती हृदय - द्वार ।।
रहा शोक से उसका नाता , चिन्तन है आधार ।।५।।
कविता ताप मिटा देती है , मन में भरे उमंग ,
दिल में है तुरंत बस जाती , बढ़ता खूब तरंग ।
छाप छोड़ती 'ठाकुर'मन में , कविता मन का हार ।।
रहा शोक से उसका नाता , चिन्तन है आधार ।।६।।
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व्याख्या--इस छन्द में अति संक्षेप में कविता की
विशेषतापर प्रकाश डालने का प्रयास
किया गया है ।
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