Thursday, December 17, 2020

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- चिंतन कविता का आधार

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विषय--क्या होती है कविता
विधा--कविता
शीर्षक--चिन्तन कविता का आधार 
             *******************
कविता होती  है निश्चय  ही , विचार   का   उद्गार ।
रहा  शोक से  उसका नाता , चिन्तन  है   आधार ।।

अथवा मन  हर्षित होता  है , छा   जाता  आनन्द ,
तभी जन्म  कविता लेती है , बन  जाते   हैं  छन्द ।
हर्ष  -  वेदना  ही   लेते   हैं , कविता का आकार ।।
रहा  शोक से  उसका नाता , चिन्तन  है   आधार ।।१।।

मन को घटना  मथ देती  है , करें  जब   दृष्टिपात ,
करुणा जागृत  होती मन मेंं , मिलते जब आघात ।
मुरदे  में  कर  देती  कविता , जीवन   का  संचार ।।
रहा  शोक से  उसका नाता , चिन्तन  है   आधार ।।२।।

भरी  वीरता  कविता  मेंं  है , देश   करे   आजाद ,
जंजीर   गुलामी  की   तोड़े , करे   वतन  आबाद ।
टिके नहीं  कविता के आगे , तोप - तीर -तलवार ।।
रहा  शोक से  उसका नाता , चिन्तन  है   आधार ।।३।।

नवाचार  कविता   लाती है , मिटा    अंधविश्वास ,
अंधकार मन  का  हरती  है , भरती नवल उजास ।
जागृति कविता से आती  है , लाती हृदय निखार ।।
रहा  शोक से  उसका नाता , चिन्तन  है   आधार ।।४।।

कविता  भावों की  धारा  है , पावन    गंगा   नीर ,
सदा आनन्द  मन मेंं  भरती , हर   लेती   है  पीर ।
कवि के  अंतर्मन मेंं  उछले , खेलती हृदय - द्वार ।।
रहा  शोक से  उसका नाता , चिन्तन  है   आधार ।।५।।

कविता ताप  मिटा  देती  है , मन  में   भरे  उमंग ,
दिल में  है तुरंत  बस जाती , बढ़ता   खूब   तरंग ।
छाप छोड़ती 'ठाकुर'मन में , कविता मन का हार ।।
रहा  शोक से  उसका नाता , चिन्तन  है   आधार ।।६।।
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व्याख्या--इस छन्द में अति संक्षेप में कविता की
             विशेषतापर प्रकाश डालने का प्रयास
             किया गया है ।

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