स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा --कविता/आलेख
विषय --मोर बस्तर
शीर्षक ---मोर बस्तर के धरती
मोर बस्तर के धरती संगी
जग म गजब महान ग ।
बनवास बखत आए रहीन ।
खुद राम भगवान ग ।
जे धरती के दंतेश्वरी मालकिन ।
दंतेवाड़ा नाम धराय ।
साल सौगोन के कटकट रुखरई ।
जिहां सुरुज हर हबर न पाय ।
बोहत गंगा कस इन्द्रावती जिहां
बांटें सुख के बरदान ग ।
जाहिर कुटुमसर मलाजकड़ुम
झर झर बोहत झरना हे ।
लाला जगदलपुरी के ।
चमकत साहित्यिक रचना हे ।
75दिन के दशहरा इहां।
मांगें पाय बरदान ग ।
आनी बानी के खनिज इहां ।
अभ्रक अयस्क भण्डार हे ।
बारसूर के ममा भांचा मंदिर ।
लागत सरग दुवार हे ।
जेकर भरोसा दिन दिन चमके ।
हमर हिन्दुस्तान ग ।
आदिवासी के बस्ती भइया।
गोंड़,हल्बी,मुरिया ,माडिया बसे ।
जेकर बोली भाखा अमरीत ।
रीति रिवाज संस्कृति फंसे ।
जल जंगल जमीन म ।
जेकर बसे परान ग ।
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