जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - मुक्त कविता
शीर्षक - " प्रौद्योगिकी की महिमा "
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चमत्कार देखो विज्ञान की,
प्रौद्योगिकी और इंसान की।
कमाल है सभी आविष्कार,
जय हो ऐसे अमूल्य ज्ञान की।।
पैदल आते थे जाते थे।
कितना समय गंवाते थे।
कुछ मीलों की दूरी को भी,
कई दिनों में तय कर पाते थे।।
आवागमन अब आसान हो गया।
बस रेल हवाई से समस्या का निदान हो गया।
सिमट गई दुनिया अब मुसाफिर,
महीनों में संसार-भ्रमण साकार हो गया।।
चिड़ियों से संदेश भेजा करते थे।
चिट्ठियों से बात हुआ करते थे।
महीनों तक इंतजार जवाब का जनाब,
डाकिया जब घर में पत्र लाया करते थे।।
फोन मोबाइल से बात तुरंत हो जाती है।
आवाज के साथ चेहरा भी दिख जाती है।
चाहें रहे घर से कितने भी दूर,
अपनेपन का अहसास करा जाती है।।
कृषि क्षेत्र भी हुआ खुशहाल।
कीटनाशक से उचित देखभाल।
हार्वेस्टर ट्रेक्टर से खेती आसान हुआ।
किसानों के लिए एक वरदान हुआ।।
चिकित्सा उपचार में भी बदलाव हुआ।
जब से एक्स-रे, सोनोग्राफी का आविष्कार हुआ।
असाध्य रोग का भी हुआ संभव इलाज,
रोबोटिक सर्जरी से जीवन दान हुआ।।
इंटरनेट का यह जमाना है।
विद्यालय भी आनलाईन जाना है।
प्रोजेक्टर से होती विश्लेषणात्मक पढ़ाई,
खाना भी जोमेटो से मंगाना है।।
कम्प्यूटर पढ़ाई का बना आधार।
डिजिटल भारत का सपना साकार।
कोडिंग-डिकोडिंग सीखते बच्चे,
साफ्टवेयर बना करते चमत्कार।।
प्रौद्योगिकी की महिमा बहुत निराली।
सुख-सुविधा से जीवन सजा डाली।
देश का तकनीकी विकास हुआ,
तकनीक से तकदीर लिख डाली।।
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मौलिक रचना ( स्वरचित )
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
Nice
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