जिला: रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा: कविता
विषय: मेरी महत्वकांक्षाएं
मुझसे जो हो सकता था, मैंने अपना श्रेष्ठ किया।
पर अब भी क्यों नहीं यकीं, मैंने नहीं कोई क्लेश दिया।
सच की राह पर चल रही, नहीं है मुझे कोई डर।
कर सकती हूँ मैं हर काम, नही हूँ किसी पर निर्भर।
कभी नहीं किसी को, अपने हित के लिए कष्ट दिया।
अपने पथ पर चलते हुए, अपना पथ प्रशस्त किया।
मन भी है निश्छल, कभी भी नहीं कोई छल किया।
मुझसे जो हो सकता था, हर वो काम अचल किया।
चिन्तन मनन कर काम करना, यह कभी न व्यर्थ हुआ।
मिला माँ का स्नेह पूरा, जिससे हर कर्म समर्थ हुआ।
अगर कभी कुछ न हो पाया, मैंने परिश्रम निरंतर किया।
कभी भी नहीं अपनों में, नहीं कभी भी अंतर किया।
जो हो सकता था मुझसे, मैंने हरदम प्रयास किया।
कभी भी मेरे ईश्वर ने, मुझे कभी न निराश किया।
स्वरचित मौलिक रचना
-इन्दु साहू,
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
👌
ReplyDelete