स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"लहरें"
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नदियों की प्रवाह प्रेरणा देती
निरंतर गतिशील रहने की
लहरें मन को हिलोरती जब
सुंदर सुखद अनुभवों देती ।
किनारों से टकराकर भी
लहरें तटनी के साथ रहती
अच्छी भावनाओं को
हृदय भी सदा सहेजती ।
मन की लहर दौड़े उधर
आत्मिक शांति मिले जिधर
अब ये रूत मिलती कहां
अशांति की व्याप्त है लहर ।
लहरों की प्रवाह यदि
अपनी हद तोड़ जाती
हवा हो या हो जल
प्रकृति पर तांडव कर जाती ।
भावनाओं की लहर बहकती
टूट जाते हर रिश्ते-नाते
तब हर मर्ज की दवा भी
जीवन में शूल बन जाती ।
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